की यात्रा संगीत के माध्यम से।
मेरी लगी बाबा संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने क्या जाने कोई क्या जाने
मेरी लगी मालोबाबा संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने।
। विवस्वत् बोले एक कथा, जगत माता पिता है मालोबाबा।
ढूंढ रहा था जन्म जन्म से, सावर्णी महायुग में मिले मालोबाबा।
मैं तो था मूर्ख अज्ञानी, मोह माया में लिपटा हुआ।
माता का एक छोटा सा सेवक, हनुमान का भक्त खड़ा ।
जब-जब आए माता की नवरात्रि, 9 दिन का व्रत रखा।
मां से मांगी एक कामना, जिसमें हो मां तेरे पुत्र का भला ऐसा वर दे दो मेरी मां।
मेरी लगी माला बाबा संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने……….
मां ने दिखाया ऐसा रास्ता, जहां मिले फिर मालोबाबा।
मैं तो ना जानू मेरे बाबा, क्यों आया मैं धरा धाम पर।
ना किया था गुरु गोसाई, बस करता था भक्ति से सेवा।
जब से जुड़ा जगत माता पिता से, मालोबाबा ने दिया आत्म स्वरूप का नाम।
तब अंदर की चेतना जगी, मालोबाबा से जुड़ के प्रेरणा जागी।
क्यों आया हूं धरा धाम पर, मालोबाबा से जुड़ के प्रेरणा जागी।
मेरी लगी मालोबाबा संग प्रीत दुनिया क्या जाने………
जब जब मालोबाबा धरा पर आए, किए हैं लीला भक्तों को दिखाएं।
यह युग था कलयुग का बाबा, जहां चेतना बंधी थी बाबा।
हुए एक तपस्वी ऐसे भारी , जिसने जोड़ी अवचेतन जग में चेतना सारी।
हुए हैं स्वयंभू मालोबाबा, लिए हैं एक तपस्वी का तन उन पर सवार हैं मालोबाबा।।
मेरी लगी बाबा संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने……….
इस युग के हैं युग पुरुषोत्तम काल्कि रूप में है मालोबाबा ।
जब जब हुई है धर्म की हानि तब तब आए हैं मालोबाबा ।
हर युग में किए हैं लीला नाम रूप है मालो बाबा।।
सतयुग में है श्री हरि के लीला हर गौरी है मालो बाबा।
त्रेता में है श्रीराम की लीला सीताराम है मालो बाबा ।
द्वापर में है श्रीकृष्ण की लीला राधेश्याम हैं मालोबाबा।
कलयुग में है श्रीश्री काल्कि रमापद्मेश्वरम् हैं मालोबाबा।
हर युग में है मालो बाबा जगत माता पिता है मालोबाबा ।
मेरी लगी बाबा संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने……..
मालो बाबा है मुक्तिदाता धर्म की रक्षा के लिए आए मालोबाबा जगत के माता जगत के पिता जगत के गुरु हैं मालोबाबा।
भक्तों को दिया है आत्म स्वरूप का ज्ञान हर काल में है मालोबाबा।
सावर्णी मनुष्य धर्म्म की प्रतिष्ठा करने आए हैं मालोबाबा ।
जब-जब हुआ है धर्म की हानि तब तक आए हैं मालोबाबा ।
सत्य सनातन का शाश्वत ज्ञान आपने दिया है मालोबाबा ।
मेरी लगी माला बाबा संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने……….
प्रभु की लीला प्रभु ही जाने ,आठ कोठारी नो दरवाजे।
अंबिका कलना से त्रिवेणी, राजराजेश्वरी धाम है प्यारा ।
बेहुला है गंगा की धारा , गुप्त वृंदावन धाम से आगे ।
दुमुधा धाम मन को भाये।। स्वादिष्ठान है जन्म की भूमि।
जहां विराजे आदि शक्ति सुमति अनीता माता।
विष्णु एस विजया पिता प्रभु के बाबा ।
आगे है त्रिवेणी का संगम ,जहां मिली गंगा सरस्वती कुंती की धारा ।
मेरी लगी माला बाबा संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने……….
शम्भल के प्रभु हैं शम्भलेश्वर , स्वयंवल गुरुकुल के निर्माता ।
सावर्णी मनुष्य का युग है लाए, युग की प्रतिष्ठा करने आए ।
संग में अपने अष्ट योग है लाए , वो हैं हमारे मालोबाबा ।
पहले योग अक्षर ब्रह्म का दिया है, अक्षर से तो मूल हमारा ।
जिसे मिलाकर लिखा है लीला सारा।
तीन दिवस का योग है अक्षर ब्रह्म का, बिना अक्षर सृष्टि ना संभव।
अक्षर में छिपा है ब्रह्म का ज्ञान, अक्षर ब्रह्म का योग दिया है मालोबाबा।
सप्त दिनों में बंधे दिवस हैं ,शिवजी ने जाना यह योग है भारी।
फिर मानव को प्रभु देने आए, लिए हैं अवतार मालोबाबा ।
सप्त दिनों में शिवयोग का ज्ञान दिए हैं मालोबाबा।
सूर्य बिना है जग अंधियारा, सूर्य के किरणों से चमके जग सारा।
12 आदित्य की महिमा, 12 दिवस का योग दिए हैं मालोबाबा।
आत्मा तो है अमर,आत्म स्वरूप को जानने के लिए, 21 दोनों का गीता ज्ञान का योग आपने दिया है मालोबाबा।
मन तो है चंचल,भटकता है नक्षत्रों पर।
27 नक्षत्र को जानने के लिए 27 दिवस का चंद्र योग आपने दिया है मालोबाबा।
भक्ति बिना है मनुष्य अधूरा, मां के 51 शक्ति पीठ की गाथा , हर अंगों के कार्यों का वर्णन ,शक्ति संघ उनकी महिमा को जनाने, 54 दिनों का शक्ति योग आपने दिया है मालोबाबा।
दर्शन की अभिलाषा हो पूरी, नाम योग दर्शन 108 योग दिवस आपने दिया है मालो बाबा।
मनुष्य को देव आत्मा बनाने, दर्शन ध्यान योग 1008 का आपने दिया है मालो बाबा।
मेरी लगी माला बाबा संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने……….
जागने मानव की चेतना, देते हर जन नर को दीक्षा बाबा। जगत को दिखाते लीला बाबा, आप ही आदि अंत हो बाबा ।
इस युग के अवतार हो बाबा, सतयुग केआधार हो बाबा।
फिर भी इस युग के नर नारी, जान ना सके आप हो काल्कि मालोबाबा।
फिर हुए हैं हजारों पौंड्रक, जो कहते हैं खुद को कल्कि बाबा।
महाकाल तत्व तो अपने लाय, आप हो काल्कि मालो बाबा।
मेरी लगी माला बाबा संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने……….
साधु रूप में कुछ ऐसे भक्त हैं, जो पहचान ना सके आपको मालोबाबा।
कण कण में तो हरिहर है , आप ही हो जगत माता-पिता मालो बाबा।
कर दो प्रभु जी ऐसी लीला , हर भक्त को दिखे मालोबाबा।
कण कण में तो मां बाबा है ,अब तो दे दो दर्शन मालो बाबा ।
हर नैनो की प्यास बुझा दो , विवस्वत् की यह आप बुझा दो ।
अब तो दे दो दर्शन मालोबाबा।
मेरी लगी बाबा संग प्रीत ये दुनिया क्या जाने ……….
जय काल्कि जय जगतपति पद्मावती जय रमापति
रमापराशक्ति सीता एवं श्रीराधा ज्ञानम्। काल्कि कृष्णा राम शिव एव श्रीश्रीमालोवावाয়ং।।

