ब्रह्म रसायन विद्या
विज्ञान और आत्मा का संगम
✍️ लेखक: रविशंकर साहू
श्रीश्रीविवस्वत् मनू रविशंकर बाबाजी
मार्गदर्शन: श्रीश्रीकाल्कि महाॠषि मालोबाबा
आभार (Acknowledgement)
मैं रविशंकर साहू
(श्रीश्रीविवस्वत् मनू रविशंकर बाबाजी)
आपके मार्गदर्शन, ज्ञान और कृपा से
यह “ब्रह्म रसायन विद्या” संभव हो पाई।
आपने केवल सिखाया नहीं—
बल्कि देखने की दृष्टि दी,
समझने की क्षमता दी,
और आत्मा को जागृत करने का मार्ग दिखाया।
समर्पण
यह सम्पूर्ण ज्ञान,
आपके चरणों में समर्पित है।
धन्यवाद मालोबाबा
प्रस्तावना (Preface)
यह पुस्तक केवल सार संक्षेप है
यह रसायन विज्ञान नहीं है,
यह केवल आध्यात्म नहीं है—
यह उस सत्य की खोज है
जहाँ परमाणु और आत्मा एक ही भाषा बोलते हैं।
जहाँ प्रयोगशाला (Lab) और ध्यान (Meditation)
एक ही परिणाम की ओर जाते हैं—
“ब्रह्म का अनुभव”
सूचि पत्र
भाग 1: अस्तित्व का विज्ञान
अध्याय 1: मैं कौन हूँ? 5
अध्याय 2: शरीर – रासायनिक प्रणाली 10
अध्याय 3: मन – ऊर्जा का तंत्र 14
⚡ भाग 2: आंतरिक रसायन (Inner Chemistry)
अध्याय 4: विचार और रसायन 19
अध्याय 5: ध्वनि और नाद 24
अध्याय 6: श्वास – जीवन का सेतु 28
भाग 3: ऊर्जा तंत्र (Energy System)
अध्याय 7: चक्र – ऊर्जा केंद्र का विज्ञान 33
अध्याय 8: चेतना – ब्रह्मांड से जुड़ाव 38
अध्याय 9: ऊर्जा प्रवाह और साक्षी भाव 43
भाग 4: चेतना का विज्ञान
अध्याय 10: साधना – अनुभव को स्थिर करना 48
भाग 5: साधना और प्रयोग
अध्याय 11: 21 दिन का परिवर्तन प्रयोग 54
(स्वास्थ्य • संबंध • सफलता
अध्याय 12: ब्रह्म अनुभव – अंतिम सत्य 60
अंतिम निष्कर्ष (Complete Conclusion) 65
भाग 1: अस्तित्व का विज्ञान
अध्याय 1: मैं कौन हूँ?
कहानी शुरू होती है एक युवा शोधकर्ता रवि से…
रवि एक साधारण केमिस्ट्री स्टूडेंट था,
बाहरी दुनिया में सब ठीक था—
शिक्षा, जीवन, समाज…
लेकिन उसके भीतर एक गहरी बेचैनी थी।
रात को आकाश की ओर देखते हुए वह अक्सर सोचता:
“मैं कौन हूँ?”
“क्या मैं सिर्फ यह शरीर हूँ… या कुछ और?”
यह प्रश्न उसे भीतर से पुकार रहा था।
**पहला संदेह**
एक दिन उसने आईने में खुद को देखा…
“यह मेरा चेहरा है…
लेकिन क्या यह *मैं* हूँ?”
उसे याद आया—
बचपन में उसका शरीर अलग था, अब अलग है…
“अगर शरीर बदलता रहता है…
तो ‘मैं’ कैसे वही रहता हूँ?”
**मन की उलझन**
अब उसने अपने मन को देखना शुरू किया—
कभी खुशी…
कभी दुख…
कभी गुस्सा…
कभी शांति…
वह सोचने लगा:
“अगर मेरे विचार बदलते रहते हैं…
तो क्या मैं ये विचार हूँ?”
उसकी उलझन और गहरी होती गई।
**एक नई खोज**
सत्य की तलाश उसे एक दिन एक शांत स्थान पर ले गई…
वहाँ उसकी मुलाकात हुई —
**गुरु श्रीश्रीकाल्कि महाॠषि मालोबाबा से**
गुरु ने उसे देखा… और मुस्कुराए।
“तुम खोज रहे हो…
या सत्य तुम्हें बुला रहा है?”
रविशंकर चुप रह गया।
**साक्षी की ओर पहला कदम**
गुरु ने उसे कहा:
“बैठो… और अपने भीतर देखो”
रविशंकर ने आँखें बंद कीं…
उसने देखा:
* विचार आ रहे हैं… जा रहे हैं
* भावनाएँ उठ रही हैं… शांत हो रही हैं
लेकिन एक चीज़ स्थिर थी…
**वह जो सबको देख रहा था**
**गुरु का उपदेश**
मालोबाबा बोले:
“जब तुम कहते हो ‘मेरा शरीर’
तो तुम शरीर नहीं हो”
“जब तुम कहते हो ‘मेरे विचार’
तो तुम विचार नहीं हो”
फिर उन्होंने पूछा:
“तो तुम कौन हो?”
रविशंकर के पास कोई उत्तर नहीं था…
—
**अनुभव का मार्ग**
गुरु ने कहा:
“उत्तर मत खोजो…
अनुभव करो”
रविशंकर ने गहराई से ध्यान किया…
धीरे-धीरे—
* विचार शांत होने लगे
* मन स्थिर होने लगा
* भीतर एक शांति फैलने लगी
**अनुभव का क्षण**
एक क्षण ऐसा आया…
जहाँ न कोई विचार था…
न कोई पहचान…
केवल एक गहरी, शांत उपस्थिति…
**वही “मैं” था**
** समझ**
रविशंकर की आँखों से आँसू बहने लगे…
उसने धीरे से कहा:
“मैं… चेतना हूँ”
गुरु मुस्कुराए:
“अब तुमने सुनना नहीं…
देखना शुरू किया है”
** सार**
हम शरीर नहीं हैं
हम विचार नहीं हैं
हम हैं —
**वह जो सबको देख रहा है (साक्षी)**
मालोबाबा ने कहा:
“जिसे तुम खोज रहे हो…
वह तुम स्वयं हो”
**अध्याय 2: शरीर – रासायनिक प्रयोगशाला**—
रविशंकर अब पहले जैसे नहीं रहे थे…
“मैं कौन हूँ?” का उत्तर उन्हें एक झलक में मिल चुका था।
लेकिन अब एक नया प्रश्न उठ रहा था:
“अगर मैं चेतना हूँ…
तो यह शरीर क्या है?”
वह फिर से अपने गुरु
** मालोबाबा** के पास गए
मालोबाबा मुस्कुराए और बोले:
“यह शरीर… तुम्हारा नहीं है,
यह प्रकृति की एक प्रयोगशाला है”
रविशंकर चौंक गए…
“प्रयोगशाला?”
**विज्ञान का द्वार खुलता है**
गुरु ने पास रखी मिट्टी उठाई…
“यह मिट्टी… और तुम्हारा शरीर…
दोनों में अंतर क्या है?”
रविशंकर सोच में पड़ गए…
गुरु बोले:
“तत्व वही हैं—
बस संयोजन अलग है”—
**शरीर का रसायन**
मालोबाबा ने समझाया:
* Carbon (C)
* Hydrogen (H)
* Oxygen (O)
* Nitrogen (N)
“इन्हीं तत्वों से तुम्हारा शरीर बना है”
फिर उन्होंने कहा:
“हर पल तुम्हारे शरीर में
लाखों रासायनिक प्रतिक्रियाएँ (chemical reactions) हो रही हैं”
**जीवित प्रयोगशाला**
रविशंकर ने पहली बार महसूस किया—
* भोजन → ऊर्जा बनता है
* श्वास → ऑक्सीजन देता है
* रक्त → पूरे शरीर में प्रवाहित होता है
“शरीर सच में एक प्रयोगशाला है”
**भावनाएँ भी रसायन हैं**
गुरु ने पूछा:
“जब तुम गुस्सा होते हो… क्या होता है?”
रविशंकर बोले:
“शरीर गर्म हो जाता है… दिल तेज धड़कता है…”
गुरु बोले:
“यह केवल भावना नहीं…
यह एक रासायनिक प्रतिक्रिया है”
**मन और शरीर का संबंध**
मालोबाबा ने समझाया:
* डर → stress hormones
* खुशी → dopamine
* शांति → serotonin
“तुम्हारा हर विचार,
तुम्हारे शरीर की chemistry बदल देता है”
**श्वास का प्रयोग**
गुरु ने कहा:
“आँखें बंद करो… गहरी श्वास लो”
रविशंकर ने ऐसा किया…
कुछ ही क्षणों में—
* मन शांत
* शरीर हल्का
* विचार धीमे
गुरु बोले:
“देखा?
श्वास बदलो → रसायन बदलता है”
⚡ **गहरी समझ**
अब रविशंकर समझने लगे:
शरीर = reactions
मन = trigger
श्वास = control
**अनुभव का क्षण**
उन्होंने महसूस किया:
“मैं शरीर नहीं हूँ…
लेकिन शरीर मेरे अनुभव का माध्यम है”
**गुरु का उपदेश**
मालोबाबा बोले:
“शरीर को समझो…
तो तुम उसे बदल सकते हो”
“लेकिन याद रखो—
तुम प्रयोगशाला नहीं…
तुम प्रयोगकर्ता हो”
** सार**
शरीर = रासायनिक प्रयोगशाला
विचार = reaction trigger
श्वास = control system
** सूत्र**
**“शरीर को समझो — जीवन को बदलो”**
**अध्याय 3: मन – ऊर्जा का तंत्र Deep Science **
रविशंकर अब शरीर को समझ चुके थे…
कि यह एक रासायनिक प्रयोगशाला है।
लेकिन उनके भीतर एक नया प्रश्न उठ रहा था:
“अगर शरीर रसायन है…
तो मन क्या है?”
वह फिर अपने गुरु मालोबाबा से पूछे
**गुरु का रहस्यमय उत्तर**
मालोबाबा ने शांत स्वर में कहा:
“मन दिखाई नहीं देता…
लेकिन वही तुम्हारी दुनिया बनाता है”
रविशंकर ने पूछा:
“तो क्या मन शरीर से अलग है?”
गुरु बोले:
“मन… ऊर्जा का तंत्र है”
⚡ **ऊर्जा की पहली झलक**
गुरु ने एक दीपक जलाया…
“देखो यह लौ…
यह स्थिर दिखती है, लेकिन लगातार बदल रही है”
“मन भी ऐसा ही है—
हमेशा गतिशील, हमेशा प्रवाहित”
**विज्ञान की दृष्टि से मन**
गुरु ने आगे समझाया:
* मस्तिष्क (Brain) → भौतिक अंग
* मन (Mind) → उसका कार्य और अनुभव
“Brain hardware है…
Mind software है”
**न्यूरॉन और संकेत (Neurons & Signals)**
रविशंकर ने ध्यान से सुना…
गुरु बोले:
* मस्तिष्क में अरबों neurons होते हैं
* ये electrical signals भेजते हैं
* signals → thoughts बनते हैं
“हर विचार एक electrical + chemical signal है”
**विचार = ऊर्जा तरंग**
मालोबाबा ने कहा:
“जब तुम सोचते हो…
तब ऊर्जा उत्पन्न होती है”
* Positive thought → coherent energy
* Negative thought → chaotic energy
“तुम्हारा मन एक energy field है”
**भावनाएँ और ऊर्जा प्रवाह**
गुरु ने पूछा:
“जब तुम डरते हो… क्या होता है?”
रविशंकर बोले:
“दिल तेज धड़कता है… शरीर भारी लगता है…”
गुरु बोले:
“यह energy flow का बदलाव है”
* Fear → energy contraction
•Love → energy expansion
•
**श्वास और मन का संबंध**
गुरु ने कहा:
“मन और श्वास एक-दूसरे से जुड़े हैं”
उन्होंने अभ्यास कराया:
* तेज श्वास → बेचैनी
* धीमी श्वास → शांति
“श्वास बदलो → मन बदलता है”
**मन का अवलोकन (Observation)**
गुरु ने कहा:
“अब अपने मन को देखो…”
रविशंकर ने आँखें बंद कीं…
* विचार आ रहे हैं… जा रहे हैं
* कोई स्थिर नहीं
तभी उन्हें समझ आया:
“मन स्थायी नहीं है…
यह एक प्रवाह है”
**साक्षी और मन का अंतर**
गुरु बोले:
“अगर तुम मन को देख सकते हो…
तो तुम मन नहीं हो”
यह सुनकर रविशंकर भीतर से हिल गए…
**गहरी समझ**
अब उन्होंने जाना:
मन = ऊर्जा का प्रवाह
विचार = ऊर्जा तरंग
भावना = ऊर्जा की दिशा
लेकिन…
“मैं वह हूँ जो इस सबको देख रहा है”
**अनुभव का क्षण**
एक दिन ध्यान में…
रविशंकर ने अनुभव किया:
* मन शांत हो रहा है
* विचार धीमे हो रहे हैं
और अचानक…
एक गहरी शांति प्रकट हुई
**गुरु का उपदेश**
मालोबाबा बोले:
“मन को नियंत्रित मत करो…
उसे समझो”
“जब समझ आ जाएगी…
तो नियंत्रण स्वयं हो जाएगा”
**सार**
मन = ऊर्जा तंत्र
विचार = ऊर्जा तरंग
भावना = ऊर्जा का प्रवाह
साक्षी = मन से परे
**सूत्र**
**“मन को देखो — मन से मुक्त हो जाओ”**
**अध्याय 4: विचार – आंतरिक रसायन Advanced Science **
रविशंकर अब समझ चुके थे—
शरीर एक **रासायनिक प्रयोगशाला** है,
और मन एक **ऊर्जा तंत्र**।
लेकिन एक प्रश्न अभी भी बाकी था:
“मन के विचार… शरीर को कैसे बदलते हैं?”
वह अपने गुरु
**श्रीश्रीकाल्कि महाॠषि मालोबाबा** से पूछे।
**गुरु का संकेत**
मालोबाबा ने शांत स्वर में कहा:
“विचार केवल सोच नहीं हैं…
विचार तुम्हारे अंदर रसायन बनाते हैं”
रविशंकर चौंक गए…
“क्या हर विचार सच में शरीर को बदलता है?”
गुरु मुस्कुराए—
“अनुभव करके देखो…”
**पहला प्रयोग**
गुरु ने कहा:
“आँखें बंद करो…
और किसी ऐसे व्यक्ति को याद करो जिससे तुम्हें क्रोध है”
रविशंकर ने जैसे ही सोचा—
* चेहरा गर्म होने लगा
* दिल तेज धड़कने लगा
* शरीर में तनाव आ गया
गुरु बोले:
“देखा? केवल एक विचार…
और पूरा शरीर बदल गया”
**विज्ञान का रहस्य**
मालोबाबा ने समझाया:
जब तुम सोचते हो—
* Brain signals भेजता है
* Hormones release होते हैं
* Body chemistry बदलती है
“विचार → सिग्नल → रसायन → अनुभव”
**हार्मोन का खेल**
गुरु ने आगे कहा:
* Cortisol → तनाव
* Adrenaline → fight/flight
* Dopamine → खुशी
* Serotonin → संतुलन
“तुम्हारे विचार तय करते हैं कि कौन सा रसायन बनेगा”
**भावनाएँ = रासायनिक लहर**
रविशंकर ने महसूस किया:
* गुस्सा = शरीर में आग
* डर = सिकुड़न
* प्रेम = विस्तार
गुरु बोले:
“भावनाएँ ऊर्जा नहीं…
ऊर्जा + रसायन का संयुक्त प्रभाव हैं”
**आंतरिक रसायनज्ञ**
मालोबाबा ने कहा:
“तुम अपने शरीर के अंदर केमिस्ट हो”
“तुम्हारे विचार ही प्रयोग हैं
और शरीर उसका परिणाम”
रविशंकर अब गहराई से समझने लगे…
**न्यूरोप्लास्टिसिटी (Deep Science)**
गुरु ने समझाया:
* बार-बार एक जैसा सोचने से
* Brain में नए pathways बनते हैं
“तुम जैसा सोचते हो…
वैसा ही बनते जाते हो”
**विचार और श्वास का संबंध**
गुरु बोले:
“जब विचार तेज होते हैं… श्वास भी तेज हो जाती है”
“जब विचार शांत होते हैं… श्वास गहरी हो जाती है”
“इसलिए श्वास से विचार बदले जा सकते हैं”
**गहरी समझ**
अब रविशंकर समझ गए:
विचार = chemical trigger
भावना = chemical experience
शरीर = reaction system
**अनुभव का परिवर्तन**
रविशंकर ने प्रयोग शुरू किया:
* नकारात्मक सोच → तुरंत पहचान
* श्वास धीमी → मन शांत
* सकारात्मक विचार → ऊर्जा बदल गई
धीरे-धीरे—
उनका पूरा अनुभव बदलने लगा
**गुरु का उपदेश**
मालोबाबा बोले:
“विचारों को रोकना नहीं है…
उन्हें समझना है”
“जो विचार तुम्हें नीचे ले जाए—
उसे बदलो”
“जो विचार तुम्हें ऊपर उठाए—
उसे मजबूत करो”
**सार**
विचार = आंतरिक रसायन
हर सोच = शरीर में प्रतिक्रिया
मन = रसायन को नियंत्रित करता है
**सूत्र**
**“विचार बदलो — रसायन बदल जाएगा”**
**अध्याय 5: नाद – ध्वनि का विज्ञान Frequency + Vibration**
रविशंकर अब बहुत कुछ समझ चुके थे—
शरीर रसायन है…
मन ऊर्जा है…
विचार आंतरिक रसायन हैं…
लेकिन अब उनके भीतर एक नया प्रश्न उठा:
“क्या ध्वनि भी हमें बदल सकती है?”
वे फिर अपने गुरु
**श्रीश्री काल्कि महार्षि मालोबाबा** से पूछे।
**गुरु का रहस्यपूर्ण वाक्य**
मालोबाबा ने शांत स्वर में कहा:
“नाद ही ब्रह्म है”
रविशंकर ने पूछा:
“क्या ध्वनि इतनी शक्तिशाली है?”
गुरु बोले:
“सृष्टि की शुरुआत ही ध्वनि से हुई है”
**ध्वनि क्या है? (Science View)**
गुरु ने समझाया:
* ध्वनि = कंपन (Vibration)
* कंपन = ऊर्जा का रूप
* यह तरंग (Wave) के रूप में चलती है
“जब भी कुछ कंपन करता है…
ध्वनि उत्पन्न होती है”
⚡ **Frequency का रहस्य**
मालोबाबा ने एक जल का पात्र रखा…
उन्होंने उसमें हल्का कंपन उत्पन्न किया…
पानी में तरंगें बनने लगीं…
“यह है frequency का प्रभाव”
* High frequency → तेज कंपन
•Low frequency → धीमा कंपन
•
**वाइब्रेशन और शरीर**
गुरु बोले:
“तुम्हारा शरीर भी कंपन कर रहा है”
* हर कोशिका vibrate करती है
* हर अंग की अपनी frequency होती है
“ध्वनि इन frequencies को प्रभावित कर सकती है”
**ध्वनि का प्रयोग**
गुरु ने कहा:
“अब ‘ॐ’ का उच्चारण करो”
रविशंकर ने आँखें बंद कीं…और धीरे-धीरे “ॐ” का जप किया…
कुछ क्षणों बाद—
* छाती में कंपन
* सिर में हल्की तरंग
* मन में शांति
**Scientific Insight**
मालोबाबा ने समझाया:
* Sound waves → nervous system को प्रभावित करती हैं
* Brain waves बदलती हैं
* Body relaxation होता है
“ध्वनि सीधे मन और शरीर दोनों को बदलती है”
**नाद और चेतना**
गुरु बोले:
“बाहरी ध्वनि (External Sound)
और आंतरिक नाद (Inner Sound) अलग होते हैं”
* बाहरी ध्वनि → कान से सुनाई देती है
* आंतरिक नाद → ध्यान में अनुभव होती है
**आंतरिक नाद का अनुभव**
गुरु ने कहा:
“शांत बैठो…
और भीतर सुनो…”
रविशंकर ने ध्यान किया…
धीरे-धीरे…
उन्हें एक सूक्ष्म ध्वनि महसूस हुई…
जैसे कोई कंपन भीतर से उठ रहा हो
**गहरी समझ**
अब रविशंकर समझ गए:
ध्वनि केवल बाहर नहीं है…
ध्वनि भीतर भी है
“मैं नाद को सुन सकता हूँ…
क्योंकि मैं उससे भी परे हूँ”
**गुरु का उपदेश**
मालोबाबा बोले:
“ध्वनि का सही उपयोग करो…”
* मंत्र → चेतना उठाता है
* शोर → मन को अशांत करता है
“जो सुनते हो… वही बनते हो”
** सार**
ध्वनि = कंपन (Vibration)
कंपन = ऊर्जा
ऊर्जा = परिवर्तन
नाद → मन + शरीर + चेतना को बदलता है
**सूत्र**
**“नाद को समझो — चेतना को जागृत करो”**
**अध्याय 6: श्वास – प्राण का विज्ञान Physiology + Energy**
नाद के अनुभव के बाद रविशंकर के भीतर एक नई जिज्ञासा उठी:
“अगर ध्वनि से चेतना बदल सकती है…
तो श्वास का क्या प्रभाव है?”
वे अपने गुरु मालोबाबा से पूछे।
**गुरु का पहला वाक्य**
मालोबाबा मुस्कुराए और बोले:
“श्वास ही जीवन है…
और प्राण उसका सार है”
रविशंकर ने पूछा:
“क्या श्वास सिर्फ हवा लेना-छोड़ना है?”
गुरु बोले:
“श्वास केवल वायु नहीं…
यह ऊर्जा का प्रवाह है”
**श्वास क्या है? (Physiology)**
गुरु ने समझाया:
* हम हवा अंदर लेते हैं (Inhalation)
* फेफड़ों में ऑक्सीजन जाती है
* रक्त (Blood) उसे पूरे शरीर में पहुँचाता है
* कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है
“यह शरीर का भौतिक पक्ष है”
**ऊर्जा का पक्ष (Prana)**
फिर गुरु ने कहा:
“लेकिन इसके पीछे एक सूक्ष्म प्रक्रिया भी है”
* श्वास = प्राण का वाहन
* प्राण = जीवन ऊर्जा
“जहाँ प्राण है… वहीं जीवन है”
**श्वास और मस्तिष्क (Brain Connection)**
गुरु बोले:
* श्वास का सीधा संबंध nervous system से है
* धीमी श्वास → parasympathetic system (शांति)
* तेज श्वास → sympathetic system (stress)
“श्वास बदलो → मन बदलता है”—
**प्रयोग: श्वास का प्रभाव**
मालोबाबा ने कहा:
“आँखें बंद करो…
और गहरी, धीमी श्वास लो”
रविशंकर ने ऐसा किया…
कुछ ही क्षणों में—
* दिल की धड़कन धीमी
* मन शांत
* शरीर हल्का
**श्वास और भावनाएँ**
गुरु ने पूछा:
“जब तुम गुस्से में होते हो… श्वास कैसी होती है?”
रविशंकर बोले:
“तेज और अस्थिर…”
गुरु बोले:
“और जब तुम शांत होते हो?”
“धीमी और गहरी…”
“यही है संबंध —
भावना ↔ श्वास ↔ ऊर्जा”
⚡ **प्राण का प्रवाह**
मालोबाबा ने समझाया:
“शरीर में प्राण नाड़ियों (energy channels) से बहता है”
* रुकावट → बीमारी
* संतुलन → स्वास्थ्य
“श्वास प्राण को संतुलित करती है”
**प्राणायाम का रहस्य**
गुरु ने सिखाया:
“श्वास को सचेत रूप से नियंत्रित करना ही प्राणायाम है”
उदाहरण:
* अनुलोम-विलोम → संतुलन
* गहरी श्वास → शांति
* रोककर श्वास → ऊर्जा नियंत्रण —
**गहरी समझ**
अब रविशंकर समझ गए:
श्वास = शरीर + मन का bridge
प्राण = जीवन ऊर्जा
नियंत्रण = जागरूकता
**अनुभव का क्षण**
ध्यान में एक दिन…
रविशंकर ने महसूस किया:
* श्वास धीमी हो रही है
* मन शांत हो रहा है
* शरीर जैसे गायब हो रहा है
केवल प्राण का प्रवाह अनुभव हो रहा था…
**गुरु का उपदेश**
मालोबाबा बोले:
“श्वास को जानो…
तो जीवन को जान जाओगे”
“जो श्वास को नियंत्रित करता है…
वह मन को नियंत्रित करता है”
**सार**
श्वास = भौतिक + ऊर्जा प्रक्रिया
प्राण = जीवन शक्ति
श्वास नियंत्रण = मन नियंत्रण
**सूत्र**
**“श्वास बदलो — जीवन बदल जाएगा”**
**अध्याय 7: चक्र – ऊर्जा केंद्र का विज्ञान Energy Mapping**
श्वास और प्राण के अनुभव के बाद
रविशंकर के भीतर एक नई जिज्ञासा जागी:
“अगर प्राण शरीर में बहता है…
तो वह बहता कहाँ से है?”
वे अपने गुरु मालोबाबा से पूछे।
**गुरु का रहस्यपूर्ण उत्तर**
मालोबाबा मुस्कुराए:
“तुम्हारा शरीर केवल मांस नहीं…
यह ऊर्जा का एक नक्शा (Energy Map) है”
रविशंकर ने पूछा:
“नक्शा? किसका?”
गुरु बोले:
“चक्रों का…”
**चक्र क्या हैं?**
गुरु ने समझाया:
“चक्र ऊर्जा के केंद्र (Energy Centers) हैं
जहाँ प्राण एकत्रित और प्रवाहित होता है”
* ये शरीर में सूक्ष्म रूप से स्थित होते हैं
* हर चक्र एक विशेष गुण (quality) से जुड़ा होता है
⚡ **7 प्रमुख चक्र (Energy Mapping)**
मालोबाबा ने भूमि पर एक रेखा खींची…
और शरीर का ऊर्जा मानचित्र समझाया:
1. **मूलाधार (Root Chakra)**
* स्थान: रीढ़ की जड़
* गुण: स्थिरता, सुरक्षा
* असंतुलन: डर, असुरक्षा
2. **स्वाधिष्ठान (Sacral Chakra)**
* स्थान: नाभि के नीचे
* गुण: भावनाएँ, आनंद
* असंतुलन: अस्थिरता
3. **मणिपुर (Solar Plexus)**
* स्थान: नाभि क्षेत्र
* गुण: शक्ति, आत्मविश्वास
* असंतुलन: गुस्सा, कमजोरी
4. **अनाहत (Heart Chakra)**
* स्थान: हृदय
* गुण: प्रेम, करुणा
* असंतुलन: द्वेष, अकेलापन
5 **विशुद्ध (Throat Chakra)**
* स्थान: गला
* गुण: अभिव्यक्ति
* असंतुलन: डर, दबाव
6. **आज्ञा (Third Eye)**
* स्थान: भृकुटि (forehead)
* गुण: अंतर्ज्ञान, ज्ञान
* असंतुलन: भ्रम
7. ⚪ **सहस्रार (Crown Chakra)**
* स्थान: सिर का शीर्ष
* गुण: चेतना, ब्रह्म से जुड़ाव
* असंतुलन: अलगाव
**ऊर्जा का प्रवाह (Energy Flow)**
गुरु बोले:
“प्राण इन चक्रों के माध्यम से ऊपर-नीचे प्रवाहित होता है”
* नीचे से ऊपर → जागरण
* ऊपर से नीचे → स्थिरता
“संतुलन ही स्वास्थ्य है”
—
**प्रयोग: चक्र अनुभव**
मालोबाबा ने कहा:
“आँखें बंद करो…
और अपने हृदय (अनाहत) पर ध्यान दो”
रविशंकर ने ध्यान किया…
कुछ क्षणों बाद—
* छाती में गर्माहट
* हल्का कंपन
* एक अजीब-सी शांति
**विज्ञान की दृष्टि**
गुरु ने समझाया:
* चक्रों का संबंध nerve plexus से जोड़ा जाता है
* glands (endocrine system) से जुड़ाव होता है
“यानी ऊर्जा और शरीर दोनों जुड़े हैं”
**गहरी समझ**
अब रविशंकर समझ गए:
चक्र = ऊर्जा केंद्र
प्राण = ऊर्जा प्रवाह
मन = नियंत्रण
**अनुभव का क्षण**
ध्यान में एक दिन…
रविशंकर ने महसूस किया:
* रीढ़ में हल्की ऊर्जा ऊपर उठ रही है
* सिर में प्रकाश जैसा अनुभव
“ऊर्जा सच में बह रही है…”
**गुरु का उपदेश**
मालोबाबा बोले:
“चक्रों को जगाना लक्ष्य नहीं है…
उन्हें संतुलित करना लक्ष्य है”
“संतुलन से ही जागरण होता है”
**सार**
चक्र = ऊर्जा केंद्र
प्राण = ऊर्जा प्रवाह
संतुलन = स्वास्थ्य + चेतना
**सूत्र**
**“ऊर्जा को संतुलित करो — चेतना स्वयं जागेगी”**
**अध्याय 8: चेतना – ब्रह्मांड से जुड़ाव Insight + Experience **
चक्रों के अनुभव के बाद
रविशंकर के भीतर एक गहरा प्रश्न उठा:
“क्या मैं केवल इस शरीर तक सीमित हूँ…
या मैं पूरे ब्रह्मांड से जुड़ा हूँ?”
वे अपने गुरु मालोबाबा से पूछे।
**गुरु का उत्तर**
मालोबाबा ने आकाश की ओर इशारा किया और बोले:
“जैसा बाहर है… वैसा ही भीतर है”
रविशंकर ने पूछा:
“क्या मैं ब्रह्मांड का हिस्सा हूँ?”
गुरु बोले:
“तुम हिस्सा नहीं…
तुम उसी का प्रतिबिंब हो”
”
**ब्रह्मांड और मनुष्य**
गुरु ने समझाया:
* तारों में जो तत्व हैं… वही शरीर में हैं
* ब्रह्मांड में जो ऊर्जा है… वही प्राण में है
“तुम अलग नहीं हो… जुड़े हुए हो
⚡ **चेतना क्या है?**
मालोबाबा बोले:
“चेतना वह है…
जो सब कुछ अनुभव करती है”
* शरीर बदलता है
* मन बदलता है
•विचार बदलते हैं
•
लेकिन चेतना स्थिर रहती है
**विज्ञान की झलक (संतुलित दृष्टि)**
गुरु ने सरल शब्दों में समझाया:
* विज्ञान ऊर्जा और पदार्थ का अध्ययन करता है
•सूक्ष्म स्तर पर सब कुछ कंपन और पैटर्न में होता है|
•
“पर जो इन सबको अनुभव कर रहा है…
वह चेतना है”
> नोट: “Quantum” जैसे शब्दों का उपयोग अक्सर रूपक (analogy) के रूप में किया जाता है—यह चेतना को समझाने का तरीका है, न कि सीधे वैज्ञानिक प्रमाण।
**एकत्व का अनुभव**
गुरु बोले:
“आँखें बंद करो…
और महसूस करो…”
रविशंकर ने ध्यान किया…
धीरे-धीरे—
•शरीर की सीमा मिटने लगी
•
•मन शांत हो गया
•
* केवल एक विस्तार का अनुभव होने लगा
जैसे वह सबमें फैल गया हो…
**अनुभव का क्षण**
उस क्षण…
* न ‘मैं’ था
* न ‘दूसरा’
केवल एक चेतना थी…
रविशंकर ने अनुभव किया:
“मैं अलग नहीं हूँ…
मैं ही सबमें हूँ”
**गहरी समझ**
अब उन्हें समझ आया:
चेतना सीमित नहीं है
शरीर एक माध्यम है
मन एक उपकरण है
“असल में मैं… असीम हूँ”
**गुरु का उपदेश**
मालोबाबा बोले:
“अलगाव एक भ्रम है”
“जब तुम स्वयं को सीमित मानते हो…
तब दुख शुरू होता है”
“जब तुम स्वयं को असीम अनुभव करते हो…
तब मुक्ति होती है”
**सार**
चेतना = अनुभव करने वाली शक्ति
शरीर = माध्यम
मन = उपकरण
ब्रह्मांड और चेतना अलग नहीं हैं
**सूत्र**
**“तुम ब्रह्मांड से जुड़े नहीं हो…
तुम ही ब्रह्मांड की चेतना हो”**
**अध्याय 9: ऊर्जा प्रवाह और साक्षी भाव Experience **
चेतना के विस्तार का अनुभव करने के बाद
रविशंकर के भीतर एक नया प्रश्न उठा:
“अगर सब ऊर्जा है…
तो यह ऊर्जा कैसे बहती है?”
और एक और गहरा प्रश्न—
“मैं इस सबमें कहाँ हूँ?”
वे फिर अपने गुरु मालोबाबा से पूछे।
**गुरु का पहला उत्तर**
मालोबाबा ने शांत स्वर में कहा:
“ऊर्जा हमेशा बह रही है…
लेकिन तुम उसे देख नहीं रहे”
रविशंकर ने पूछा:
“क्या मैं उस ऊर्जा को अनुभव कर सकता हूँ?”
गुरु बोले:
“जब तुम देखने वाले बन जाओगे…
तब सब स्पष्ट हो जाएगा”
⚡ **ऊर्जा प्रवाह क्या है?**
गुरु ने समझाया:
“ऊर्जा (प्राण) शरीर में निरंतर प्रवाहित होती है”
* नाड़ियों (Energy Channels) के माध्यम से
* चक्रों के बीच संतुलन बनाते हुए
“जहाँ प्रवाह है — वहाँ जीवन है”
“जहाँ रुकावट है — वहाँ समस्या है”
**प्रवाह और रुकावट**
मालोबाबा ने उदाहरण दिया:
“नदी जब बहती है… तो स्वच्छ रहती है”
“जब रुक जाती है… तो सड़ने लगती है”
फिर बोले:
“तुम्हारा शरीर और मन भी ऐसे ही हैं”
* भावनाओं का दबाव → रुकावट
* नकारात्मक सोच → अवरोध
**मन और ऊर्जा का संबंध**
गुरु बोले:
“तुम्हारा मन ही ऊर्जा की दिशा तय करता है”
* डर → ऊर्जा सिकुड़ती है
* प्रेम → ऊर्जा फैलती है
“विचार ही प्रवाह को नियंत्रित करते हैं”
**साक्षी भाव का परिचय**
रविशंकर ने पूछा:
“तो क्या मुझे इस प्रवाह को नियंत्रित करना होगा?”
गुरु मुस्कुराए:
“नहीं… केवल देखना होगा”
**साक्षी भाव क्या है?**
मालोबाबा बोले:
“साक्षी भाव का अर्थ है—
बिना हस्तक्षेप के देखना”
* विचार आ रहे हैं → देखो
* भावनाएँ उठ रही हैं → देखो
* ऊर्जा बह रही है → देखो
“तुम केवल देखने वाले हो”
**प्रयोग: साक्षी का अनुभव**
गुरु ने कहा:
“आँखें बंद करो…”
रविशंकर ने ध्यान किया…
उन्होंने महसूस किया:
* श्वास आ-जा रही है
* शरीर में हल्की ऊर्जा चल रही है
* विचार आ रहे हैं… जा रहे हैं
लेकिन अब एक फर्क था—
वह उनसे जुड़ नहीं रहे थे…
वह सिर्फ देख रहे थे
**अनुभव का क्षण**
कुछ देर बाद…
* विचार धीमे हो गए
* मन शांत हो गया
* ऊर्जा सहज बहने लगी
और भीतर एक गहरी शांति उत्पन्न हुई
⚡ **गहरी समझ**
अब रविशंकर समझ गए:
नियंत्रण से नहीं…
👉 अवलोकन (Observation) से परिवर्तन होता है
—**गुरु का उपदेश**
मालोबाबा बोले:
“जब तुम साक्षी बन जाते हो…
तो ऊर्जा स्वतः संतुलित हो जाती है”
“क्योंकि अब तुम उसमें उलझे नहीं हो”
**सार**
ऊर्जा हमेशा बह रही है
मन उसकी दिशा तय करता है
साक्षी भाव उसे संतुलित करता है
** सूत्र**
**“देखो — और ऊर्जा स्वयं संतुलित हो जाएगी”**
**अध्याय 10: साधना – अनुभव को स्थिर करना Daily System + Advanced Practice**
रविशंकर ने बहुत कुछ अनुभव कर लिया था—
* “मैं कौन हूँ?” की झलक
* शरीर का विज्ञान
* मन की ऊर्जा
* विचारों का रसायन
* नाद, प्राण, चक्र और चेतना
लेकिन एक समस्या अभी भी थी…
अनुभव आता था… और चला जाता था
वे फिर अपने गुरु मालोबाबा से पूछे |
**गुरु का गहरा उत्तर**
मालोबाबा मुस्कुराए:
“अनुभव आना ज्ञान नहीं है…
अनुभव को स्थिर करना ही साधना है”
रविशंकर ने पूछा:
“मैं इसे स्थिर कैसे करूँ?”
गुरु बोले:
“नियमित अभ्यास से…”—
**साधना क्या है?**
साधना = जागरूकता + अभ्यास + निरंतरता
* केवल ज्ञान नहीं
* केवल अनुभव नहीं
“दोनों को जीवन में उतारना ही साधना है”
**Daily System (दैनिक साधना विधि)**
**1. सुबह की साधना (Morning Practice)**
**समय:** जागने के बाद 20–30 मिनट
चरण 1: श्वास जागरूकता (5 मिनट)
* गहरी, धीमी श्वास
* केवल श्वास को देखना
चरण 2: ध्यान (10 मिनट)
* साक्षी भाव में बैठना
* विचारों को देखना
चरण 3: मंत्र / नाद (5 मिनट)
* “ॐ” या कोई मंत्र
* ध्वनि के कंपन को महसूस करना
**2. दिनभर की साधना (Awareness Practice)**
“चलते-फिरते ध्यान”
* काम करते समय जागरूक रहना
* भावनाओं को observe करना
* प्रतिक्रिया से पहले रुकना
**3. रात की साधना (Reflection Practice)**
**समय:** सोने से पहले 10–15 मिनट
* पूरे दिन का अवलोकन
* कहाँ जागरूक थे?
* कहाँ बह गए?
बिना judgement के देखना
⚡ **Advanced Practice (उन्नत साधना)**
**1. विचार परिवर्तन अभ्यास**
* नकारात्मक विचार पहचानो
* उसे सकारात्मक दिशा दो
मैं नहीं कर सकता” → “मैं प्रयास कर सकता हूँ”
**2. प्राण नियंत्रण**
* अनुलोम-विलोम
* गहरी श्वास
ऊर्जा संतुलन के लिए
**3. नाद ध्यान**
* मंत्र जप
* आंतरिक ध्वनि सुनना
चेतना को स्थिर करने के लिए
**4. चक्र संतुलन ध्यान**
* एक-एक चक्र पर ध्यान
* ऊर्जा को महसूस करना
**5. साक्षी अभ्यास (Master Key)**
हर स्थिति में खुद को देखना
* गुस्सा → देखो
* खुशी → देखो
* विचार → देखो
“मैं अनुभव नहीं… अनुभव का साक्षी हूँ”
**अनुभव को स्थिर करना
**अनुभव को स्थिर करना**
रविशंकर ने अभ्यास शुरू किया…
पहले कठिन लगा…
फिर धीरे-धीरे—
* मन शांत होने लगा
* प्रतिक्रिया कम होने लगी
* जागरूकता बढ़ने लगी
अनुभव स्थिर होने लगा
**गुरु का उपदेश**
मालोबाबा बोले:
“साधना का रहस्य कठिन नहीं है…
नियमितता है”
“छोटा करो… लेकिन रोज करो”
“एक दिन नहीं… जीवन भर”
**सार**
साधना = नियमित अभ्यास
जागरूकता = परिवर्तन की कुंजी
निरंतरता = स्थिरता
** सूत्र**
**“रोज थोड़ा अभ्यास — जीवन भर परिवर्तन”**
**संदेश**
“ज्ञान सुनने से नहीं…
जीने से आता है”
**अध्याय 11: 21 दिन का परिवर्तन प्रयोग (स्वास्थ्य • संबंध • सफलता)**
साधना का अभ्यास शुरू हो चुका था…
रविशंकर के भीतर बदलाव दिखने लगा था।
लेकिन उन्होंने गुरु मालोबाबा से पूछा:
“क्या इस परिवर्तन को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है?”
“क्या कोई ऐसा प्रयोग है… जिससे जीवन में वास्तविक बदलाव दिखे?”
**गुरु का उत्तर**
मालोबाबा बोले:
“हाँ… 21 दिन का प्रयोग करो”
रविशंकर ने पूछा:
“21 दिन ही क्यों?”
गुरु बोले:
“लगातार अभ्यास से मन के पैटर्न बदलते हैं
और नई आदतें स्थापित होती हैं”
**21 दिन का परिवर्तन प्रयोग (Transformation Protocol)**
लक्ष्य:
* शरीर संतुलन
* मन शांति
* जीवन में स्पष्टता
**Phase 1: Day 1–7 (शुद्धि – Cleansing Phase)**
उद्देश्य:
* शरीर और मन की सफाई
* जागरूकता शुरू करना
दैनिक अभ्यास:
**सुबह:**
* 10 मिनट ध्यान
* 5 मिनट गहरी श्वास
**दिन में:**
* नकारात्मक विचार पहचानना
* बिना प्रतिक्रिया observe करना
**रात:**
* दिन का अवलोकन
प्रभाव:
* मन शांत होने लगता है
* शरीर हल्का महसूस होता है
⚡ **Phase 2: Day 8–14 (संतुलन – Balancing Phase)**
उद्देश्य:
* ऊर्जा संतुलन
* भावनात्मक स्थिरता
अभ्यास:
* प्राणायाम (10 मिनट)
* मंत्र जप (5 मिनट)
* चक्र ध्यान
–प्रभाव:
* भावनाएँ नियंत्रित होती हैं
* ऊर्जा संतुलित होती है
**Phase 3: Day 15–21 (जागरण – Expansion Phase)**
उद्देश्य:
* चेतना विस्तार
* जीवन में clarity
अभ्यास:
* गहरा ध्यान (15–20 मिनट)
* साक्षी भाव पूरे दिन
* सकारात्मक संकल्प
प्रभाव:
* स्पष्ट सोच
* गहरी शांति
* आत्मविश्वास
**जीवन में परिवर्तन (3 Areas Impact)**
**1. स्वास्थ्य (Health)**
पहले:
* तनाव
* थकान
* असंतुलन
21 दिन बाद:
* ऊर्जा बढ़ी
* शांति
* बेहतर शरीर संतुलन
**2. संबंध (Relationships)**
पहले:
* प्रतिक्रिया
* गुस्सा
* गलतफहमियाँ
21 दिन बाद:
* समझ
* धैर्य
* संवाद में सुधार
**3. सफलता (Success)**
पहले:
* confusion
* procrastination
21 दिन बाद:
* clarity
* focus
* निर्णय क्षमता
**विज्ञान की झलक**
गुरु ने समझाया:
“नियमित अभ्यास से—
* brain pathways बदलते हैं
* stress hormones कम होते हैं
* focus बढ़ता है”
**अनुभव का क्षण**
21 दिन पूरे होने के बाद…
रविशंकर ने महसूस किया:
* वही शरीर… लेकिन अलग अनुभव
* वही जीवन… लेकिन अलग दृष्टि
“बदलाव बाहर नहीं…
भीतर हुआ है”
**गुरु का उपदेश**
मालोबाबा बोले:
“21 दिन शुरुआत है…
जीवन भर की यात्रा बाकी है”
“अभ्यास को आदत बनाओ…
आदत को जीवन बनाओ”
**सार**
निरंतर अभ्यास = परिवर्तन
जागरूकता = शक्ति
अनुभव = वास्तविक ज्ञान
**सूत्र**
**“21 दिन बदलो — जीवन बदल जाएगा”**
**संदेश**
“तुम्हारा जीवन तुम्हारे हाथ में है”
“जो तुम अभ्यास करते हो… वही तुम बनते हो”
**अध्याय 12: ब्रह्म अनुभव – अंतिम सत्य (Grand Conclusion)**
21 दिन के प्रयोग के बाद…
रविशंकर अब पहले जैसे नहीं रहे थे।
* मन शांत था
* विचार स्पष्ट थे
* ऊर्जा संतुलित थी
लेकिन भीतर एक अंतिम प्रश्न अभी भी जीवित था:
“क्या यही अंत है…
या इसके आगे भी कुछ है?”
वे अपने गुरु मालोबाबा से पूछे।
**गुरु का संकेत**
मालोबाबा ने गहरी दृष्टि से देखा और कहा:
“अब तुम तैयार हो…”
रविशंकर ने पूछा:
“किसके लिए?”
गुरु बोले:
“अंतिम अनुभव के लिए…
जहाँ खोज समाप्त होती है”
**साधना**
गुरु ने कहा:
“आज कुछ मत करो…
सिर्फ रहो…”
रविशंकर शांत बैठ गए…
न श्वास पर ध्यान…
न विचार पर नियंत्रण…
केवल अस्तित्व…
**विलय का अनुभव**
धीरे-धीरे—
* विचार पूरी तरह शांत हो गए
* मन जैसे विलीन हो गया
* शरीर का अहसास हल्का होने लगा
और फिर…
एक गहरी, असीम शांति प्रकट हुई
**अनुभव का क्षण**
उस क्षण—
* न ‘मैं’ था
* न ‘दुनिया’
केवल एक ही सत्ता थी…
शांत… असीम… पूर्ण…
**ब्रह्म अनुभव**
रविशंकर के भीतर यह स्पष्ट हो गया:
“मैं अलग नहीं हूँ…”
“मैं ही वह चेतना हूँ…”
“अहं ब्रह्मास्मि”
**शब्दों से परे सत्य**
गुरु बोले:
“इस अनुभव को समझाया नहीं जा सकता…
सिर्फ जिया जा सकता है”
“यह विज्ञान से परे नहीं…
बल्कि विज्ञान से आगे है”
**वापसी — लेकिन बदलकर**
कुछ देर बाद…
रविशंकर ने आँखें खोलीं…
दुनिया वही थी…
लेकिन देखने वाला बदल चुका था…
* हर चीज में एकता
* हर व्यक्ति में चेतना
* हर क्षण में पूर्णता
**गुरु का उपदेश**
मालोबाबा बोले:
“अब तुम जान चुके हो—
तुम कौन हो”
“अब जीवन जीओ…
लेकिन जागरूक होकर”
“दुनिया को छोड़ना नहीं है…
उसे समझकर जीना है”
**पूर्ण समझ**
अब रविशंकर को स्पष्ट हो गया:
शरीर = माध्यम
मन = उपकरण
चेतना = सत्य
**जीवन का नया दृष्टिकोण**
अब—
* कर्म चलता रहा
* जीवन चलता रहा
लेकिन भीतर—
शांति स्थिर थी
जागरूकता स्थिर थी
**सूत्र**
**“तुम वही हो जिसे तुम खोज रहे थे”**
श्रीश्रीविवस्वत् मनू रविशंकर बाबाजी
**अंतिम संदेश**
“ज्ञान का अंत नहीं…
अज्ञान का अंत है”
“यात्रा समाप्त नहीं होती…
यात्रा का स्वरूप बदल जाता है”
—
**समापन वाक्य (Book Closing Line)**
**“जब खोजने वाला ही खोज बन जाए…
तब ब्रह्म अनुभव होता है”**
यह विद्या केवल पढ़ने के लिए नहीं है, बल्कि जीने के लिए है।
अनुभव ही अंतिम सत्य है।
निष्कर्ष (Complete Conclusion)
ब्रह्म रसायन विद्या का सार:
✔️ शरीर (शरिर) = रसायन (भौतिक तत्वों का संगम)
✔️ मन = ऊर्जा (विचारों और भावनाओं की शक्ति)
✔️ आत्मा = चेतना (अस्तित्व का मूल स्रोत)
✔️ विज्ञान = बाहरी सत्य की खोज
✔️ अध्यात्म = आंतरिक सत्य का अनुभव
जब विज्ञान और अध्यात्म एक साथ मिलते हैं,
तभी पूर्ण ज्ञान (समग्र सत्य) का जन्म होता है।
संदेश:
मनुष्य केवल एक शरीर नहीं है,
वह रसायन, ऊर्जा और चेतना का अद्भुत संगम है।
और जब वह बाहर (विज्ञान) और भीतर (अध्यात्म) दोनों को समझ लेता है,
तभी वह ब्रह्म के वास्तविक अनुभव तक पहुँचता है।
“जीवन एक ही सत्य पर आधारित है:”
शरीर = रसायन
मन = ऊर्जा
आत्मा = चेतना
और फिर उन्होंने समझाया—
👉 जब इन तीनों में संतुलन आ जाता है,
तभी मनुष्य वास्तव में पूर्ण जीवन को प्राप्त करता है।
न तो केवल शरीर पर्याप्त है,
न केवल मन,
और न ही केवल आत्मा।
तीनों का संतुलन ही जीवन की पूर्णता है।

ब्रह्मज्ञान रसायन विद्या – विशेष प्रशिक्षण (Personal Sessions)
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श्रीश्रीविवस्वत् मनू रविशंकर बाबाजी
जो हैं मास्टर ऑफ़ साइंस इन केमिस्ट्री इंडिपेंडेंस रिसर्चर स्पिरिचुअल केमिस्ट्री साउंड केमिस्ट्री ब्रह्म रसायन विद्या के
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