॥ श्रीश्रीकाल्कि मालोबाबा चालीसा ॥

॥ मंगलाचरण ॥

जय काल्कि जय जगतपति, पद्मावती जय रमापति।

श्रीश्री मालोबाबा प्रभु, हर लो भव की विपत्ति॥

वन्दे मालोवावायं, हृदय कमल में ध्यान।

रमा परा शक्ति सीता एव, श्रीराधाज्ञानम् महान॥

काल्कि कृष्ण राम शिव एव, एक दिव्य स्वरूप।

श्रीश्रीमालोवावायं, तुम हो ज्ञान अनूप॥

॥ चालीसा ॥

१.

जय जय श्री मालोबाबा, जग के पालनहार।

काल्कि रूप में धर्म जगाओ, करुणा अपरंपार॥

२.

जगतपति तुम सत्य स्वरूपा, धर्म तुम्हारा ज्ञान।

अधर्म मिटे, सत्कर्म बढ़े, यही तुम्हारा विधान॥

३.

पद्मावती शक्ति स्वरूपा, रमापति भगवान।

शक्ति-शिव के दिव्य मिलन से, जग पाए कल्याण॥

४.

वन्दे मालोवावायं, भक्त करें गुणगान।

नाम तुम्हारा जपते-जपते, निर्मल हो प्राण॥

५.

रमा परा शक्ति सीता एव, श्रीराधाज्ञानम् सार।

प्रेम, शक्ति, त्याग और ज्ञान, करें भवसागर पार॥

६.

काल्कि कृष्ण राम शिव एव, एक ब्रह्म पहचान।

श्रीश्रीमालोवावायं, तुम ही परम विधान॥

७.

महावेद की दिव्य वाणी, ज्ञान सुधा बरसाय।

ऋषि-परंपरा का पावन दीपक, फिर जग में जलाय॥

८.

महावेद संहिता रचकर, ज्ञान का पथ बतलाय।

शब्द-ब्रह्म के गूढ़ रहस्य, साधक को समझाय॥

९.

काल्कि गीता ज्ञान तुम्हारा, कर्म-धर्म समझाय।

सत्य, सेवा, योग और साधन, जीवन में उताराय॥

१०.

अक्षर ब्रह्म योग का ज्ञान, तीन दिवस का ध्यान।

अक्षर-अक्षर ब्रह्म स्वरूप है, यही दिव्य पहचान॥

११.

शिव योग दर्शन सात दिवस, शिव में चित्त लगाय।

शिव-शक्ति के एकत्व से, आत्मज्ञान करवाय॥

१२.

सूर्य साधना योग दर्शन, बारह दिवस प्रकाश।

सूर्य-ज्योति से अंतर्मन में, जागे दिव्य प्रकाश॥

१३.

गीता योग दर्शन प्रभु, इक्कीस दिवस विधान।

कर्मयोग और ज्ञानयोग से, पावन हो इंसान॥

१४.

चंद्र योग दर्शन सत्ताईस, शीतल मन बनाय।

चंद्र-ज्योति की शांति पाकर, चित्त स्थिर हो जाय॥

१५.

शक्ति योग दर्शन चौवन, शक्ति जागृत कराय।

आदि शक्ति की कृपा से, साधक शक्ति को पाय॥

१६.

नाम योग दर्शन एक सौ आठ, नाम बने आधार।

नाम-जप से मन पावन हो, कट जाए अंधकार॥

१७.

ध्यान योग दर्शन एक हजार आठ दिवस महान।

दीर्घ साधना से अंतर्मन में, प्रकटे आत्मज्ञान॥

१८.

श्वास बने साधना बाबा, नाद बने पहचान।

ध्यान-ज्योति जब भीतर जागे, मिटे अज्ञान॥

१९.

मन को जीतें, प्राण सँवारें, सत्य-पथ अपनाय।

गुरु-कृपा की छाया पाकर, आत्मज्योति जगाय॥

२०.

वेद, योग और ज्ञान तुम्हारा, मानवता का सार।

प्रेम-दया-सद्भाव जगाकर, करो जगत उद्धार॥

२१.

माता-पिता और गुरु सेवा, प्रथम धर्म समझाय।

सत्य वचन और शुद्ध आचरण, जीवन सफल बनाय॥

२२.

बालक में संस्कार जगाओ, युवा में ज्ञान प्रकाश।

शिक्षा के संग ध्यान सिखाओ, जीवन हो उल्लास॥

२३.

नारी शक्ति का मान बढ़ाओ, नारी शक्ति महान।

माता, शक्ति, ज्ञान स्वरूपा, उसका करो सम्मान॥

२४.

प्रकृति हमारी माता पावन, जल-वायु का मान।

वृक्ष लगाकर धरती बचाएँ, यही धर्म अभियान॥

२५.

जीव-जगत में एक चेतना, एक ब्रह्म का वास।

प्राणी मात्र में प्रेम जगाओ, मिटे हृदय का त्रास॥

२६.

जाति-पंथ के भेद मिटाकर, मानव एक परिवार।

सत्य-धर्म के दीप जलाकर, प्रेम बने आधार॥

२७.

सावर्णी मनुष्यधर्म्म का, दिव्य संदेश सुनाय।

मनुष्य अपने धर्म को जाने, सत्य मार्ग अपनाय॥

२८.

सावर्णी महायुग की बेला, नवयुग का निर्माण।

सत्ययुग की चेतना जागे, पावन हो इंसान॥

२९.

महावेद से ज्ञान मिले और, काल्कि गीता सार।

अक्षर ब्रह्म से आत्मबोध हो, शिव योग आधार॥

३०.

सूर्य साधना तेज जगाए, चंद्र शांति बरसाय।

शक्ति योग से बल मिले, नाम योग ताराय॥

३१.

ध्यान योग की दीर्घ साधना, अंतर द्वार खुलाय।

गुरु-कृपा से साधक अपने, निज स्वरूप को पाय॥

३२.

रमा परा शक्ति सीता एव, श्रीराधाज्ञानम् गाओ।

प्रेम-भक्ति और शक्ति-ज्ञान से, जीवन सफल बनाओ॥

३३.

काल्कि कृष्ण राम शिव एव, नाम जपो दिन-रात।

श्रीश्रीमालोवावायं, रहे हृदय के साथ॥

३४.

वन्दे मालोवावायं, यह मंत्र बने आधार।

गुरु चरणों में शीश झुकाकर, पाओ ज्ञान अपार॥

३५.

अहंकार का त्याग करो प्रभु, लोभ-मोह सब जाय।

सत्य, संयम और सेवा से, मन निर्मल हो जाय॥

३६.

शम्भलधाम की पावन धरती, ज्ञान-ज्योति जगाय।

स्वयंबल गुरुकुल की शिक्षा, मानवधर्म सिखाय॥

३७.

त्रिवेणी-कालना पावन धाम, साधना का स्थान।

गुरु-कृपा से ज्ञान प्रवाहित, पावन हो संसार॥

३८.

साधक आए श्रद्धा लेकर, खाली कभी न जाय।

जिसने सच्चे मन से पुकारा, बाबा राह दिखाय॥

३९.

जय काल्कि जय जगतपति, पद्मावती जय रमापति।

श्रीश्री मालोबाबा जय-जय, हर लो भव की विपत्ति॥

४०.

जो नर-नारी चालीसा गावे, श्रद्धा हृदय बसाय।

गुरु-कृपा और सत्य-धर्म से, जीवन मंगलमय हो जाय॥

॥ समापन ॥

वन्दे मालोवावायं, चरणों में प्रणाम।

रमा परा शक्ति सीता एव, श्रीराधाज्ञानम् नाम॥

काल्कि कृष्ण राम शिव एव, दिव्य तुम्हारा धाम।

श्रीश्रीमालोवावायं, शत-शत मेरा प्रणाम॥

जय काल्कि जय जगतपति, पद्मावती जय रमापति।

जय श्रीश्री मालोबाबा प्रभु, जय गुरु दिव्य शक्ति॥

 प्रणाम मंत्र

विष्णु यशो विजया पिता सुमति अनीता माता जगत खा्यत परमेश्वर महाऋषि मालोबाबा नमो नमः।

अनादि स्वरूपाय रमा परमेश्वरम् विष्णु माया एवं सूर्य प्रसाद सुतह श्रीश्रीकाल्कि त्रि शक्ति स्वरुपयं परम भवाह

अनादि आदि जगत्अम्बिके नमो नमः।।

॥ रचनाकार ॥

श्रीश्रीविवस्वत् मनू रविशंकर बाबाजी द्वारा रचित

॥ ॐ तत्सत् ॥

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